Paper- 3036, Unit- 1, लोंजाइनस
लोंजाइनस औदात्य सिध्दान्त के प्रतिष्ठापक लोंजाइनस माने जाते हैं । लोंजाइनस का असली नाम ज्ञात नहीं है। वह यूनानी काव्यालोचन का शिक्षक था। उसका काल पहली से लेकर तीसरी शदी तक होने का अनुमान है। लोंजाइनस के ग्रन्थ ‘ पे री हु प्सुस ’ (Peri Hupsous)की खोज 16 वीं शताब्दी में हो सकी और इसका प्रथम संस्करण 1554 ई में प्रकाशित हो सका,जो अभी अपूर्ण माना जाता है। इस ‘ पे री हु प्सुस ’ में जिसका अंग्रेजी अनुवाद ‘दि सब्लाइम’(The Sublime) किया गया है, जिसका तात्पर्य है- ‘ ऊँचाई पर ले जाना ’ या ‘ ऊपर उठाना ’, औदात्य सिध्दान्त की प्रतिष्ठा की गयी है। लोंजाइनस ने औदात्य की प्रेरणा कैसिलियस (Caecilius) के निबन्ध उदत्त से ली थी। लोंजाइनस ने काव्य को श्रेष्ठ बनाने वाले तत्वों पर विचार करते हुए इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया है। वे उदात्त को काव्य को श्रेष्ठ बनाने वाला तथा कवि को प्रतिष्ठा दिलाने वाला तत्व मानते हैं। यह उदात्त महान विचारों संगठित अलंकार योजना , अभिजात्य पद रचना तथा प्रभाव की गरिमा में निहित है। वे वागाडंबर और भावाडंबर को उदाद्त्ता मे...