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शैलीविज्ञान

  शैलीविज्ञान का स्वरूप शैली का तात्पर्य संस्कृत शब्द शील से है। पाश्चात्य विचारकों के अनुसार , शैली STYLE का पर्याय है , जो लैटिन भाषा स्टाइलस से निर्मित , जिसका अर्थ - कलम , लेखनी है। अतः स्टाइल का अर्थ लिखने का ढंग , लेखक की अभिव्यक्ति की विशेषता , रचना पद्धति से है। शैलीविज्ञान  (stylistics) शब्द दो शब्दो से मिलकर बना है - शैली और विज्ञान , जिसका शाब्दिक अर्थ है ' शैली का विज्ञान ' अर्थात‌‌‌‌ जिस विज्ञान में शैली का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित रूप सें अध्ययन किया जाए वह शैलीविज्ञान है। ’ शैली ’ शब्द अंग्रेजी के स्टाइल (Style) शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। उसी प्रकार ' शैलीविज्ञान ' अंग्रेजी के स्टाइलिस्टिक्स (Stylistics) है। शैलीविज्ञान समीक्षा का नवीन आयाम है जो साहित्य का अध्ययन भाषा विज्ञान के सिद्धांत और प्रविधि के आधार पर करता है । डा० रवींद्र नाथ श्रीवास्तव के मत में -- शैलीविज्ञान साहित्यिक आलोचना का सिद्धांत भी है और प्रणाली भी। शैलीविज्ञान   भाषाविज्ञान   एवं   साहित्यशास्त्र   दोनों की सहायता लेता हुआ भी दोनों से अलग स्वतंत्र विज्ञान है। शैलीवि...

यथार्थवाद

  यथार्थवाद स्वरूप यथार्थवाद अंग्रेजी शब्द 'Realism' का हिंदी रूपांतरण है। Realism  दो शब्दों से मिलकर बना है Real+ism । Real  शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द से मानी जाती है जिसका अर्थ ' वस्तु ' तथा ism  का अर्थ- वाद। इस प्रकार Realism का शाब्दिक अर्थ है वस्तुवाद अथवा वस्तु के अस्तित्व के संबंध में विचारधारा । अतः यथार्थवाद वस्तु के अस्तित्व को स्वीकार करता है और वस्तु की वास्तविकता पर बल देता है । यह विचारधारा भौतिकवाद पर आधारित है । भौतिकवाद के अनुसार केवल भौतिक जगत ही सत्य है इस प्रकार यथार्थवाद का सिद्धांत है, जो जगत को उसी रूप में स्वीकार करता है जिस रूप में वह दिखाई पड़ता है या अनुभूति किया जाता है। यथार्थवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसका बीजारोपण मानव मस्तिष्क में अति प्राचीन काल में ही हो गया था , किन्तु जहाँ तक यथार्थवाद के वैज्ञानिक स्वरूप का प्रश्न है हम यह कह सकते हैं कि जिस यथार्थवादी विचारधारा का बहुत पहले मानव मस्तिष्क में अचेतन रूप से बीजारोपण हो गया था , उसका सूत्रपात १६वीं शताब्दी के अन्त में हुआ जो १७वीं शताब्दी तक पहुँचते पहुँचते एकदम स्पष्ट...

कालरीज

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  कालरिज: कल्पना और फैन्सी   कल्पना   सिद्धांत: कॉलरिज   ने   कल्पना   को   सौंदर्य   विधायिनी   तथा   सर्जनात्मक   शक्ति   के   रूप   में   स्वीकार   किया   है।   उसके     अनुसार  ‘‘ कवि   प्रतिभा   का   शरीर   उत्तम   बोध   है।   ऊहा   उसका   वस्त्रावरण   है ,  गति   उसका   जीवन   है   और     कल्पना   उसकी   आत्मा   है ,  जो   सर्वत्र   और   प्रत्येक   में   है   और   सबको   समन्वित   कर   उसे   एक   ललित   ओर   सुबोध   परिपूर्ण   रूप   प्रदान   करती   है। ’’   काजरिज   ने   मौलिक   काव्य   प्रतिभा   केलिए निम्नांकित   बातों   पर धध्यान दिया   है   -   1.  विषयानुरूप   छंद   रचना   का ...